Skip to main content

Posts

Showing posts from August, 2015

#4_Punch4Inspiration

जरा याद उन्हे भी करलो...........In The Memory Of Our Soldiers

जिसे सोच के दिल घबराता है, वो मुस्कुराते हुये तुम युही कर गये, याद तुम्हे कर फीर आंखे भर आई आज, इतिहास मे अमर तुम हो गये. युही नही ये देश, “ गर्व ” तुम पर करता है, तुम जवानो के खातीर ही तो, ये चैन की निंद ले पाता है,


बम ओर गोलीयो की आवाजो को कैसे तुम सह पाते हो, मौत के उस मैदान मे भी, तुम निडर कैसे हो जाते हो, जो कर गुजर गये हो तुम सब, हर साल इतिहास ये दोहरायेगा, ना होता अगर साथ तुम्हारा, कैसे होता जश्न ये आझादीका,



लब्ज नही है उस मा के लिये, जिसने जनम्‌ तुम्हे दिया होगा, हर बार देख कर तिरंगे को, उसने पास तुम्हे पाया होगा, कोई पल नही होगा ऐसा, सास चैन की जब उसे आती होगी, दुर कही उन सीमाओंसे, यादो की डोली जब आती होगी,


सुनकर तुम्हारी कहानीओ को, हम सबका बचपन गुजरा है, जब जब हुई है गौरव की बाते, सभीने तुमको ही याद किया है,  सब झुम रहे हे खुशीओसे, आज आझादी के इस मौके पर, लेकीन......ना भुले है तुमको कभी, ना भुलेंगे कभी हम, ये वादा पुराना, हम आज फिर दोहराते है, ये वादा पुराना, हम आज फिर दोहराते है……

जय जवान      जय हिंद        वंदे मातरम्‌

उलझन

कुछ सही होगा कुछ गलत होगा, संभल कर जीने का यही एक कारण होगा. नया कुछ करने की चाहत हमेशा रहेगी, कर पायेंगे या नही, ये घबराहट भी तो आगे होगी -------- ()

किसी चीज का पुरा पता होना मतलब, उस बेचैनी को मार देना, जो जीने का सही ढंग सिखाती है. सब कुछजो पहलेसे पता हो, तो किसे मजा फिर आगे बढने मे आता है -------- ()

हर रोज एक ही काम हम न जाने कितनी बार करते है, गलतीया उसमे भी होने की गुंजाइश तो फीर भी रहती है, मतलब इसका ये नही, की हमे वो काम आता नही है, लेकीन तजुरबे के साथ दिमाख का इस्तमाल क्या हम सही मे करते है -------- ()

जिंदगी ऐसी ही है दोस्तो, उलझन जिसे हम कहते है, तजुरबा न होने से आने वाली एक बिमारी का नाम है, सुलझ जाये जो, तो बिगडा काम बना दे, उलझ जाये तो, सही-गलत को भी भुला दे -------- ()

कुछ तो ऐसा होगा जो इस उलझन से बचाये, बस उसीको तो धुंडने आगे बढना है हमे, सोच समझ कर कदम रखते आगे बढेंगे हम, किस्मत……जो मौजुद है आगे पिछे चारो ओर हमारे, छोड देते है, उलझन का सवाल भी उसीके सहारे -------- ()